डिजिटल जागरूकता ही बचाव है - श्री अशोक कुमार लोढा , निदेशक केन्द्रीय सूचना केंद्र, चित्तोडगढ
विजन कॉलेज, चित्तौड़गढ़ में सेफर इंटरनेट डे का आयोजन अत्यंत उत्साह और जागरूकता के साथ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को इंटरनेट, मोबाइल ऐप्स, ऑनलाइन गेमिंग तथा डिजिटल वित्तीय लेन-देन के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक बनाना था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में श्री अशोक कुमार लोधा, निदेशक, नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC), चित्तौड़गढ़ एवं शिक्षा विभाग का प्रतिनिधत्व श्री पंकज सुराना, श्री नवीन शर्मा , श्री के पी मेनारिया द्रावारा किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. माजिद खान द्वारा मुख्य अतिथि के स्वागत से हुई। उन्होंने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा की जानकारी प्रत्येक छात्र के लिए अनिवार्य है, क्योंकि शिक्षा, बैंकिंग, प्रतियोगी परीक्षाएं और दैनिक जीवन की अधिकांश गतिविधियाँ इंटरनेट पर आधारित हो चुकी हैं।
इसके पश्चात मुख्य प्रचालन अधिकारी सुभाष पारीक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए वर्तमान और भविष्य में इंटरनेट की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान और ई-गवर्नेंस के कारण इंटरनेट हमारे जीवन का आधार बन चुका है, अतः इसका सुरक्षित उपयोग ही डिजिटल प्रगति का सही मार्ग है। उप प्रधानाचार्या श्री मति रिद्धि जाजू ने बचो बच्चो को जागरूक बनाने और भारत में इन्टरनेट इस्तेमाल को सुरक्षित बाबाने के भारत सर्कार के अभियान का हिस्सा बनाने का अहवान किया
मुख्य अतिथि श्री अशोक कुमार लोधा ने विस्तृत पावर-पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न डिजिटल खतरों और उनके समाधान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने “स्मार्ट टेक, सेफ चॉइस” के संदेश के साथ साइबर हाइजीन (Cyber Hygiene) अपनाने पर विशेष जोर दिया।
अपनी प्रस्तुति में उन्होंने निम्न प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की—
फिशिंग (Phishing) ठगी: नकली ईमेल, SMS या व्हाट्सऐप संदेशों के माध्यम से पासवर्ड और बैंक विवरण चोरी करना।
OTP एवं UPI फ्रॉड: किसी भी परिस्थिति में OTP या UPI PIN साझा न करने की सख्त सलाह।
फर्जी कस्टमर केयर और रिमोट एक्सेस स्कैम: AnyDesk या TeamViewer जैसे ऐप्स इंस्टॉल करने से होने वाले खतरे।
मैलवेयर एवं स्पायवेयर: अनजान स्रोतों से ऐप डाउनलोड करने के दुष्परिणाम।
सोशल मीडिया हैकिंग: मजबूत और यूनिक पासवर्ड तथा 2FA (Two-Factor Authentication) के उपयोग का महत्व।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम: सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से ठगी करने की घटनाएं।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि यदि कोई साइबर अपराध का शिकार हो जाए तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें या www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
श्री लोधा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सकारात्मक उपयोग—जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सुरक्षा—के साथ-साथ इसके संभावित जोखिमों जैसे डीपफेक, गोपनीयता हनन और गलत सूचना के प्रसार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों से अपील की कि किसी भी वीडियो, ऑडियो या समाचार को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें।कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई उपयोग की ऑनलाइन प्रतिज्ञा लेने के लिए प्रेरित किया गया तथा साइबर हाइजीन मोबाइल एप एवं ई-लर्निंग कोर्स के बारे में जानकारी दी गई।यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा। विजन कॉलेज, चित्तौड़गढ़ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। समारोह सहायक आचार्य श्री पंकज दलाल , श्रीमती सुधा पंचोली , श्री मति सोनाली राजपूत एवं श्रीमती नीतू शर्मा के निर्देशन में आयोजित किया गया जिसका संचालन तृतीय वर्ष विज्ञान के छात्र अंशुमन जोशी के द्वारा किया गया |
“सुरक्षित इंटरनेट – सशक्त युवा, सुरक्षित भारत।”
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